कुल्लू, करंट न्यूज़: अपनी माटी की खुशबू और बोली को सहेजने के उद्देश्य से भाषा एवं संस्कृति विभाग, हिमाचल प्रदेश, जिला कुल्लू द्वारा शुक्रवार को देव सदन सभागार में “हमारी बोली एवं संस्कृति” विषय पर भाषण प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। कक्षा पांचवीं तक के बच्चों ने कुल्लवी संस्कृति, वेशभूषा और जनजीवन पर अपने विचार रखकर सभी का मन जीत लिया।
*25 पाठशालाओं के 51 बच्चों ने लिया भाग*
कार्यक्रम का शुभारंभ राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम’ के साथ हुआ। जिला कुल्लू की 25 पाठशालाओं से आए 51 नन्हे प्रतिभागियों ने आत्मविश्वास के साथ कुल्लवी बोली में अपने विचार प्रस्तुत किए। बच्चों ने पहाड़ी जीवनशैली, पारंपरिक पहनावे और लोक परंपराओं को बड़े ही सहज ढंग से बयां किया।
*आयुष्मान बने विजेता*
प्रतियोगिता में राजकीय प्राथमिक विद्यालय मन्यासी, सैंज के आयुष्मान ने प्रथम स्थान प्राप्त किया। राजकीय प्राथमिक विद्यालय पनिहार, बंजार की समायरा द्वितीय और राजकीय प्राथमिक विद्यालय हुरन, मणिकर्ण की आरवी तृतीय स्थान पर रहीं। राजकीय केंद्रीय प्राथमिक विद्यालय सुल्तानपुर की स्मृति को सांत्वना पुरस्कार से नवाजा गया।

निर्णायक मंडल में सहायक लोक संपर्क अधिकारी जयप्रकाश शर्मा, कुल्लवी बोली विशेषज्ञ पल्लवी ठाकुर और राज सरगम शामिल थे। मंच संचालन मानवी शर्मा ने अपने प्रेरणादायक शब्दों से किया।
*‘बोली से ही जिंदा रहती है संस्कृति’*
जिला भाषा अधिकारी प्रोमिला गुलेरिया ने विजेताओं को मोमेंटो और प्रमाण पत्र देकर सम्मानित किया। उन्होंने कहा कि स्थानीय बोलियों को विलुप्त होने से बचाने और बच्चों में संस्कार व संस्कृति के प्रति सम्मान जगाने के लिए ऐसी प्रतियोगिताएं बेहद जरूरी हैं। उन्होंने शिक्षकों और अभिभावकों से अपील की कि वे बच्चों को घर और स्कूल में अपनी बोली और परंपराओं से जोड़ें।
कार्यक्रम में विभिन्न स्कूलों के अध्यापक और अभिभावक भी उपस्थित रहे। अंत में राष्ट्रगान के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ।