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विद्यार्थियों ने ली नशा मुक्त समाज बनाने की शपथ, हेल्पलाइन नंबर भी किए साझा

कुल्लू, करंट न्यूज़ :  जिला कुल्लू में युवाओं को नशे की गिरफ्त से बचाने के लिए चलाए जा रहे जिला स्तरीय जागरूकता अभियान के तहत मंगलवार को दो बड़े शिक्षण संस्थानों में विशेष कार्यक्रम आयोजित किए गए।

औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान पतलीकुहल और डीएवी सीनियर सेकेंडरी स्कूल कटराई में विद्यार्थियों को नशे के दुष्परिणामों से अवगत करवाया गया।

कार्यक्रमों का नेतृत्व क्षेत्रीय अस्पताल कुल्लू के वरिष्ठ चिकित्सक, जिला कार्यक्रम अधिकारी एवं एटीएफ भुंतर के नोडल अधिकारी डॉ. सत्यव्रत वैद्य ने किया। उनके साथ एटीएफ की काउंसलर और स्वास्थ्य विभाग की टीम भी मौजूद रही।

*‘नशा दीमक की तरह खोखला करता है’ : डॉ. वैद्य* 

डॉ. सत्यव्रत वैद्य ने आईटीआई पतलीकुहल में करीब 200 प्रशिक्षुओं और डीएवी कटराई में 350 से अधिक विद्यार्थियों को संबोधित किया। उन्होंने कहा, “नशा एक ऐसी दीमक है जो व्यक्ति को अंदर से खोखला कर देती है। यह सिर्फ शरीर ही नहीं, बल्कि करियर, परिवार और सामाजिक प्रतिष्ठा को भी खत्म कर देता है।”

उन्होंने चिट्टा, हेरोइन, चरस, गांजा, शराब और तंबाकू जैसे नशों के शारीरिक व मानसिक प्रभावों को उदाहरण देकर समझाया। डॉ. वैद्य ने बताया कि नशे की शुरुआत अक्सर जिज्ञासा, संगत या तनाव से होती है, लेकिन इसका अंत बेहद दर्दनाक होता है।

*मुख्य बिंदु: जो विद्यार्थियों को बताए गए*

*नशे की पहचान*: व्यवहार में बदलाव, पढ़ाई से अरुचि, आंखें लाल रहना, पैसे की बार-बार मांग करना।

*कानूनी पहलू*: NDPS एक्ट के तहत नशे की तस्करी और सेवन दोनों दंडनीय अपराध हैं।

*इलाज संभव है*: ATF भुंतर में नशा पीड़ितों का मुफ्त इलाज और काउंसलिंग की सुविधा उपलब्ध है।

*हेल्पलाइन*: राष्ट्रीय नशा मुक्ति हेल्पलाइन 14446 पर 24×7 संपर्क कर सकते हैं।

*‘न खुद करेंगे, न करने देंगे’* 

कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों ने हाथ उठाकर नशे से दूर रहने और अपने साथियों को भी जागरूक करने का संकल्प लिया। डीएवी कटाराई की छात्रा ने कहा, “आज पता चला कि एक बार की गलती जिंदगी भर का पछतावा बन सकती है। हम अपने स्कूल को नशा मुक्त रखेंगे।”

आईटीआई के प्रधानाचार्य ने कहा कि तकनीकी शिक्षा के साथ-साथ बच्चों का नैतिक विकास भी जरूरी है। डीएवी की प्रधानाचार्या ने स्वास्थ्य विभाग की पहल की सराहना करते हुए भविष्य में भी ऐसे कार्यक्रम करवाने का आग्रह किया।

> *डॉ. सत्यव्रत वैद्य, नोडल अधिकारी ATF भुंतर यह बोले* 

कहा कि  “अभिभावक बच्चों के दोस्त बनें। उनसे रोजाना बात करें, उनकी परेशानी समझें। यदि किसी में नशे के लक्षण दिखें तो डांटने की बजाय तुरंत ATF भुंतर या नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र लाएं। समय पर इलाज से 90% मामले ठीक हो जाते हैं। नशा छोड़ो, जीवन जोड़ो” इस लक्ष्य को अपनाएं।

*जिले में चल रहा विशेष अभियान* 

गौरतलब है कि जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग कुल्लू संयुक्त रूप से स्कूल, कॉलेज और आईटीआई स्तर पर नशा मुक्ति जागरूकता अभियान चला रहा है। इसका मकसद युवाओं को शुरुआती दौर में ही नशे के जाल से बचाना है। एटीएफ भुंतर पिछले एक साल में 200 से अधिक युवाओं को नशे के चंगुल से बाहर निकाल चुका है।

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