केलंग, करंट न्यूज : उपायुक्त लाहुल-स्पीति की अध्यक्षता में ग्येपांग घाट, सिस्सू में ग्लेशियर लेक आउटबर्स्ट फ्लड (GLOF) न्यूनीकरण उपायों को लेकर एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई।
इस बैठक में बॉर्डर रोड ऑर्गनाइजेशन (बीआरओ) के ऑफिशियल कमांडिंग अधिकारी, सहायक आयुक्त, पुलिस विभाग, बी.डी.ओ. केलांग, तहसीलदार, जल शक्ति विभाग के अधिशासी अभियंता तथा लोक निर्माण विभाग के अधिकारी उपस्थित रहे।
यह बैठक लाहुल-स्पीति को आपदा मुक्त बनाने की दिशा में उठाया गया एक महत्वपूर्ण एवं प्रथम कदम है। इस पहल के अंतर्गत पुणे स्थित सी-डैक (C-DAC) टीम द्वारा ग्येपांग झील क्षेत्र में अर्ली वार्निंग सिस्टम (पूर्व चेतावनी प्रणाली) स्थापित की जाएगी। जिससे संभावित आपदाओं की जानकारी समय रहते प्राप्त हो सकेगी।
साथ ही जल शक्ति विभाग द्वारा हाई फ्लड लेवल मार्किंग का कार्य किया जाएगा। ताकि जलस्तर में वृद्धि की स्थिति में खतरे के स्तर को स्पष्ट रूप से पहचाना जा सके। इसके अतिरिक्त, सभी संवेदनशील गांवों के लिए निकासी एवं बचाव योजनाएं तैयार की जाएंगी। जिससे किसी भी आपदा की स्थिति में जनहानि एवं संपत्ति की हानि को न्यूनतम किया जा सके।
उल्लेखनीय है कि वैज्ञानिक आंकड़ों के अनुसार ग्येपांग झील का आकार पिछले 33 वर्षों में लगभग 178 प्रतिशत तक बढ़ गया है, जिससे क्षेत्र में GLOF जैसी घटनाओं का खतरा बढ़ गया है।
इस मौके पर उपायुक्त किरण भड़ाना ने कहा कि “लाहुल-स्पीति जैसा संवेदनशील जिला जलवायु परिवर्तन और ग्लेशियर झीलों के बढ़ते आकार से प्रभावित हो रहा है। हमें वैज्ञानिक दृष्टिकोण, तकनीकी सहयोग और जनसहभागिता के माध्यम से ऐसी आपदाओं से निपटने के लिए तैयार रहना होगा।