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धर्मचंद यादव, संपादक, करंट न्यूज़।

कुल्लू दशहरा उत्सव के प्रथम दिन एक मैजिस्ट्रेट यानि तहसीलदार के साथ जिस तरह का सलूक तथाकथित देउलुओं द्वारा किया गया, वह निश्चित तौर पर बेहद ही निंदनीय है।

लेकिन हैरत इस बात की है कि इस घटना को हुए 15 दिन हो गए हैं लेकिन अभी तक प्रशासकीय तौर पर एक भी अधिकारी ने इस घटना की निंदा के लिए अपना मुंह नहीं खोला है। एक तरह से मैजिस्ट्रेट के साथ हुए अभद्र व्यवहार व मारपीट के मामले में तमाम प्रशासकीय अधिकारी गहन खामोशी में है। केवल राजस्व संघ के अधिकारियों व कर्मचारियों के अलावा तमाम प्रशासकीय व्यवस्था में घोर सन्नाटा छाया हुआ है।

जिस जिला मुख्यालय पर यह शर्मनाक घटना घटी है वहां के उपायुक्त से लेकर किसी भी अधिकारी ने अभी तक इस घटना पर अपना मुंह नहीं खोला है। किसी भी तरह का कोई बयान नहीं आया, न कार्रवाई का आश्वासन दिया गया न मैजिस्ट्रेट के जख्मों पर मरहम लगाने का प्रयास हुआ।

इतना ही नहीं बल्कि प्रदेश भर में कहीं से भी किसी भी अधिकारी ने इस घटना की निंदा नहीं की। प्रदेश स्तर की बात करें तो मुख्य सचिव से लेकर तमाम अधिकारियों के मुंह इस मसले पर सिले हुए हैं। एक तरह से साफ तौर पर कहें तो पूरी प्रशासकीय व्यवस्था में मरघट सा सन्नाटा छाया हुआ है।

केवल पुलिस महानिदेशक ने राजस्व अधिकारी संघ के साथ अपना बयान सांझा किया है। इस मसले पर उनकी तरफ से ही एकमात्र बयान आया कि इस मामले में कड़ी कार्रवाई की जाएगी और कुछ लोगों की गिरफ्तारी हुई है।

हालांकि, हिमाचल प्रदेश के सेवानिवृत्ति वरिष्ठ आईएएस अधिकारी तरुण श्रीधर ने इस मसले पर अपनी कड़ी प्रक्रिया दी है। उन्होंने हिमाचल के तमाम अधिकारियों को भी चेताया है कि अगर इस तरह की घटनाओं की निंदा नहीं की और कार्रवाई नहीं हुई, तो निश्चित तौर पर आने वाले समय में प्रशासकीय अधिकारियों को इस तरह की घटनाओं को झेलने के लिए तैयार रहना पड़ेगा।

उन्होंने बड़े साफ शब्दों में लिखा कि जिस तरह कुल्लू दशहरे के दौरान एक मैजिस्ट्रेट स्तर के अधिकारी के साथ सलूक हुआ है, वह निश्चित तौर पर पूरी शासकीय व्यवस्था के लिए शर्मनाक और घातक साबित होगा। लेकिन उसके बावजूद भी अभी तक हिमाचल प्रदेश की प्रशासकीय व्यवस्था मैं छाया सन्नाटा नहीं टूटा है।

अगर साफ़ तौर पर कहें तो इस घटना से साफ संकेत मिलता है कि आने वाले समय में किसी भी अधिकारी से अगर लोगों को परेशानी होगी, तो वह उस अधिकारी के साथ इसी तरह का सलूक करने को तैयार मिलेंगे।

क्योंकि कुल्लू वाले प्रकरण में जिस तरह से तथाकथित देउलुओं द्वारा एक मैजिस्ट्रेट स्तर के अधिकारी से गुंडई की गई और तमाम पुलिस प्रशासन इस मामले पर तमाशा बना हुआ है। निश्चित तौर पर आने वाले समय में इस तरह के लोग किसी भी अधिकारी के गिरेबान में हाथ डालने से कतई संकोच नहीं करेंगे।

प्रशासकीय व्यवस्था में दूसरा पहलू पुलिस विभाग का बहुत महत्वपूर्ण है। लेकिन इस घटनाक्रम में पुलिस की भूमिका बेहद ही घटिया वह निम्न स्तर की रही है। 60-70 पुलिस कर्मचारियों के साथ-साथ बड़े अधिकारियों की तैनाती व घटनाक्रम में कुछ पलों के लिए कुछ पुलिसकर्मियों का शामिल रहना और उसके बाद वहां से भाग जाना निश्चित तौर पर जनता के बीच में पुलिस की छवि को बुरी तरह से धूमिल करता है।

जिन पुलिस कर्मचारियों के बूते आम जनता अपने को महफ़ूज महसूस करती है वही पुलिस कर्मचारी एक मजिस्ट्रेट स्तर के अधिकारी को गुंडई भीड़ के बीच में अकेला छोड़कर फरार हो जाते हैं। तो ऐसे में कौन पुलिस के ऊपर अपनी सुरक्षा का भरोसा जताएगा। इस मामले में कुल्लू एसपी ने भी अभी तक अपना मुंह नहीं खोला है वह पूरी तरह से इस मसले पर खामोशी धारण किए हुए हैं।

लेकिन प्रबुद्ध लोगों का मानना है कि निश्चित तौर पर इस मामले में शामिल रहे पुलिस कर्मचारियों व अधिकारियों पर कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए। लेकिन अभी तक इस मसले पर एसपी की तरफ से भी कोई बयान नहीं आया है।

हैरत इस बात की भी है कि इस घटनाक्रम को हुए 15 दिन बीत जाने के बावजूद भी अभी तक कुल्लू दशहरा आयोजन समिति के अध्यक्ष व विधायक सुंदर ठाकुर व उपाध्यक्ष एवं उपायुक्त तोरूल एस रवीश की तरफ से एक लाइन का बयान भी नहीं आया है।

जो निश्चित तौर पर प्रशासकीय व्यवस्था पर एक प्रश्न चिन्ह लगता है और आने वाले समय में प्रशासकीय व्यवस्था के लिए यह घटना पूरी तरह से खतरे का संकेत है। क्योंकि इस घटना से असामाजिक व गुंडा तत्व के हौसले निश्चित तौर पर बढ़ेंगे और किसी अधिकारी की कार्य प्रणाली से अगर कोई प्रसन्न नहीं हुआ तो इस तरह के लोग अधिकारियों को कहीं भी घसीट पीट सकते हैं।

ऐसे में बेहतर होगा कि जो तमाचा प्रशासकीय व्यवस्था पर कुल्लू दशहरा उत्सव के दौरान पड़ा है, उसकी दर्द को गाल सहलाने के बजाय ठोस कार्रवाई करने से ही आत्म सामान बना रहेगा। अन्यथा भविष्य के लिए तमाम प्रशासकीय व्यवस्था को इस तरह की घटनाएं झेलने के लिए तैयार रहना होगा।

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