शिमला, करंट न्यूज़ : हिमाचल में सरकारी आवासों के मनमाने आवंटन और अवैध कब्जों पर हाईकोर्ट एकदम सख्त हो गया है। अफसरों की तर्ज पर पत्रकारों को बांटे गए सरकारी मकानों पर कोर्ट ने कड़ा संज्ञान लिया है।
मुख्य न्यायाधीश गुरमीत सिंह संधावालिया और न्यायाधीश जिया लाल भारद्वाज की खंडपीठ ने राज्य सरकार से तीखे सवाल पूछे हैं।
*हाईकोर्ट ने क्या पूछा?*
जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान कोर्ट को बताया गया कि राज्य में बड़ी संख्या में सरकारी आवासों पर पत्रकारों का कब्जा है, जो अफसरों की तर्ज पर आवंटित किए गए हैं।
इस पर कोर्ट ने सरकार को नया हलफनामा दायर करने के आदेश दिए हैं। कुल कितने सरकारी आवासों पर पत्रकारों का कब्जा है? उन्हें किस कानून या प्रावधान के तहत ये आवास दिए गए? आवंटन की तारीखें क्या हैं और उन्हें किस टाइप (श्रेणी) के मकान दिए गए हैं?
*6 पूर्व CPS को बिना आवेदन के लाभ*
5 अगस्त 2026 की सुनवाई में खुलासा हुआ था कि सरकार ने हिमाचल प्रदेश सरकारी आवास आवंटन नियम 1994 के नियम 24 का दुरुपयोग कर 6 पूर्व मुख्य संसदीय सचिवों (CPS) के अवैध कब्जे को बिना आवेदन के ही नियमित कर दिया था।
कोर्ट ने सख्त टिप्पणी की थी – “यदि हाईकोर्ट ने नोटिस जारी न किया होता, तो सरकार इस पूरे मामले को कालीन के नीचे दबा देती।”
कोर्ट ने मुख्य सचिव से जवाब मांगा था कि क्या यह शक्तियों का मनमाना इस्तेमाल नहीं है। लेकिन सरकार पिछली सुनवाई के आदेश के बावजूद हलफनामा दायर करने में विफल रही, जिस पर कोर्ट ने कड़ी नाराजगी जताई है।
अगली सुनवाई 28 अक्टूबर को होगी, तब तक सरकार को पूर्व CPS और पत्रकारों दोनों मामलों में पूरा ब्यौरा पेश करना होगा।