शिमला | करंट न्यूज़: भक्तों के लिए बड़ी राहत। हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय ने किन्नौर कैलाश यात्रा को स्थायी रूप से प्रतिबंधित करने के पौवारी ग्राम पंचायत के प्रस्ताव पर रोक लगा दी है।
*न्यायमूर्ति ज्योत्सना रेवाल दुआ* की पीठ ने प्रशासन को स्पष्ट निर्देश दिए कि कानून और सुरक्षा प्रोटोकॉल का पालन करते हुए यात्रा को सुचारू रूप से जारी रखा जाए। कोर्ट ने पौवारी ग्राम पंचायत को यात्रा के संचालन में किसी भी प्रकार का हस्तक्षेप करने से प्रतिबंधित कर दिया है।
*क्या था पूरा विवाद*
यह मामला *श्री प्रकाशंकर किन्नर कैलाश यात्रा संस्था* और एक अन्य पंजीकृत संस्था की याचिका के बाद सामने आया। दोनों संस्थाएं हिमाचल प्रदेश सोसायटी पंजीकरण अधिनियम 2006 के तहत पंजीकृत हैं और जिला प्रशासन के निर्देशों पर *वार्षिक किन्नर कैलाश यात्रा* का आयोजन करती हैं।
पौवारी ग्राम पंचायत ने 13 जुलाई को ग्राम सभा बैठक में प्रस्ताव पारित कर यात्रा को स्थायी रूप से रोकने और आयोजन संस्था को *भंग करने* का आदेश दिया था। पंचायत का कहना था कि 112 के मुकाबले 62 हस्ताक्षरों से यह निर्णय लिया गया।
याचिकाकर्ताओं ने कोर्ट में दलील दी कि पंचायत को पंजीकृत संस्थाओं को भंग करने का कोई कानूनी अधिकार नहीं है।
*यात्रा का ऐतिहासिक महत्व*
याचिका में बताया गया कि राज्य सरकार ने *12 जून* को उच्च स्तरीय बैठक में यात्रा कराने का निर्णय लिया था। इसके बाद 1 जुलाई से किन्नौर कैलाश यात्रा शुरू हो चुकी है और 30 जुलाई तक चलने की उम्मीद है। प्रशासन इसे आगे भी बढ़ा सकता है।
यह यात्रा *अनादि काल से हर साल* होती आ रही है। देशभर से विभिन्न धर्मों और क्षेत्रों के तीर्थयात्री इसमें शामिल होते हैं।
*हाईकोर्ट के सख्त निर्देश*
कोर्ट ने राजस्व सचिव, पंचायती राज सचिव, DC किन्नौर, SDM कल्पा, SP किन्नौर और BDO कल्पा को निर्देश दिए कि वे सुनिश्चित करें कि यात्रा सभी कानूनों और सुरक्षा उपायों
के साथ जारी रहे।
जिला प्रशासन, विशेषकर DC किन्नौर, SDM कल्पा और SP किन्नौर की जिम्मेदारी होगी कि यात्रा का सुचारू संचालन हो। इस मामले की अगली सुनवाई 10 अगस्त को होगी।
हाईकोर्ट के इस फैसले से तीर्थयात्रियों और आयोजन समिति ने राहत की सांस ली है।