नेरचौक (मंडी) करंट न्यूज़ : यह एक अधिकारी की नहीं, एक मां जैसी संवेदना की कहानी है। जिसमें एसडीएम बल्ह (मंडी) स्मृतिका नेगी की मानवीय पहल से 5 साल से अपने परिवार से बिछड़ी एक बेटी की घर वापसी का रास्ता खुल गया है।

Mission Apno Tak के तहत वर्षों से बिछड़ी 32 वर्षीय ममता उर्फ मंजू को डिप्टी कमिश्नर, कपूरथला की टीम को सौंपा गया। यहां से उसे स्टेट प्रोटेक्टिव होम, जालंधर ले जाया जाएगा, जहां जरूरी प्रक्रिया के बाद उसे उसके परिवार से मिलाया जाएगा।
*2021 में ऊना में मिली थी, बोलने-समझने में थी असमर्थ*
करीब 32 वर्षीय ममता 30 मई 2021 को जिला ऊना में लावारिस हालत में मिली थी। संवाद और स्मरण से जुड़ी कठिनाइयों के कारण वह अपना नाम-पता भी नहीं बता पाती थी। इसके बाद उसे मंडी के चलाखा, लुनापानी स्थित स्वधार गृह (महिला) में संस्थागत देखभाल में रखा गया।

मगर, एसडीएम स्मृतिका नेगी ने इस केस को सिर्फ एक फाइल नहीं, एक बिछड़ी बेटी के दर्द के रूप में लिया। उन्होंने लगातार उसकी काउंसलिंग, देखभाल और परिवार की तलाश जारी रखी। उम्मीद और प्रयास के 5 साल बाद आखिरकार कपूरथला में उसके परिवार का पता लगाने में सफलता मिली।

*एक वीडियो कॉल और छलके आंसू*
अधिकारियों के मुताबिक परिवार का पता चलते ही जब ममता की वीडियो कॉल पर बात कराई गई तो दोनों तरफ खुशी के आंसू थे। वहीं से उसकी घर वापसी की प्रक्रिया शुरू हो गई।
*इनकी रही अहम भूमिका*
इस पूरी यात्रा में अरुण बोथरा, IPS, ADG ओडिशा रेलवे पुलिस, आदित्य IPS, SSP गुरदासपुर, डिप्टी कमिश्नर कपूरथला का महत्वपूर्ण सहयोग रहा।

इसके साथ ही सामाजिक कार्यकर्ता दिलीप पांडे, पूर्व विधायक (AAP), डॉ. रूमा देवी, डॉ. परमिंदर सिंह, सबिता चंदा (India Cares), सीडीपीओ जितेंद्र सैनी और स्वधार गृह की पूरी टीम का भी विशेष योगदान रहा।

एसडीएम स्मृतिका नेगी ने कहा कि “Mission Apno Tak हर बिछड़े व्यक्ति को उसके अपनों तक पहुंचाने का एक प्रयास है। ममता की घर वापसी की यह शुरुआत है, अंत नहीं।”