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धर्मचंद यादव, संपादक करंट न्यूज़।

बर्फ से ढकी चोटियों, नीले आसमान और चंद्रा व भाग की संगम स्थली के आंचल में लाहुल-स्पीति अपनी हजारों साल पुरानी जनजातीय विरासत के साथ फिर तैयार है। 14 से 16 अगस्त तक केलांग में राज्य स्तरीय लाहुल-स्पीति जनजातीय उत्सव-2026 का भव्य आयोजन किया जा रहा है। तीन दिन तक घाटी संगीत, नृत्य, शिल्प और स्वाद से सराबोर रहेगी।

उत्सव का मकसद: परंपरा को मंच, युवाओं को पहचान

उपायुक्त लाहुल-स्पीति किरण भड़ाना ने बताया कि इस उत्सव का मुख्य उद्देश्य लाहुल की विशिष्ट जनजातीय संस्कृति और जीवनशैली को देश-दुनिया के सामने लाना है।

कहा कि “यह सिर्फ मेला नहीं है। यह हमारी सदियों पुरानी परंपराओं और आधुनिक आकांक्षाओं का संगम है। स्थानीय कलाकारों, शिल्पकारों और युवाओं को बड़ा मंच मिलेगा,”

उत्सव के आधिकारिक टीजर का अनावरण 10 अगस्त को प्रातः 11 बजे जनजातीय संग्रहालय केलांग में किया जाएगा।

3 दिन, 3 रंग: क्या खास होगा इस बार

14 से 16 अगस्त तक केलांग का मुख्य मंच लाहुल की आत्मा बन जाएगा।

1. लोक कला और संगीत

लाहुल की प्रसिद्ध नाटी, शबू, क्यांग और लोसार गीत। ढोल-नगाड़ों की थाप पर स्थानीय महिला और पुरुष पारंपरिक वेशभूषा में थिरकेंगे। भूटिया और तोशी समुदाय के लोक नृत्य भी मुख्य आकर्षण रहेंगे।

2. हस्तशिल्प और स्थानीय उत्पाद

पिन-पार्वती की ऊन से बने पटू, चूक्तू, थंग और पश्मीना की प्रदर्शनी। लकड़ी के नक्काशीदार सामान, थांगका पेंटिंग और स्थानीय जड़ी-बूटियों के स्टॉल लगेंगे। किसानों के सेब, मटर और औषधीय पौधों को भी बाजार मिलेगा।

3 स्वाद व संस्कृति

थुक्पा, मोमोज, चांग, अराक और स्क्यू जैसे पारंपरिक व्यंजनों का जायका। साथ ही लाहुल के घरों जैसी झांकी में ग्रामीण जीवनशैली को दिखाया जाएगा – कैसे लोग सर्दियों में घरों में रहते हैं, ऊन कातते हैं और त्योहार मनाते हैं।

प्रकृति भी बनेगी मंच का हिस्सा

आयोजकों ने इस बार लाहुल के प्राकृतिक सौंदर्य को भी उत्सव में जोड़ा है। चंद्रा नदी के किनारे फोटो प्रदर्शनी, ट्राइबल फूड फेस्ट और हिमालयन संस्कृति पर सेमिनार होंगे। पर्यटकों के लिए केलांग, जिस्पा और उदयपुर के भ्रमण पैकेज भी तैयार किए गए हैं।

स्थानीय युवाओं के लिए बड़ा मौका

लाहुल स्पीति की विधायक अनुराधा राणा के अनुसार, यह उत्सव लाहुल के युवाओं को अपनी जड़ों से जोड़ने का जरिया है। “जब हमारा गाना, हमारा खाना और हमारा शिल्प स्टेज पर आएगा तो दुनिया को पता चलेगा कि लाहुल न सिर्फ बर्फ के पहाड़ हैं , बल्कि जीवंत संस्कृति को भी सहेजे हुए है,”

कैसे पहुंचे?

14 से 16 अगस्त तक देश भर से पर्यटक और प्रदेशवासी बस या अपने वाहन द्वारा केलांग पहुंच सकते हैं। मनाली-केलांग और काजा-केलांग मार्ग खुले रहेंगे। प्रशासन ने रहने और सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए हैं।

उपायुक्त किरण भड़ाना ने सभी से अपील की है कि “आइए, हिमालय की इस सांस्कृतिक राजधानी में 3 दिन बिताएं। लाहुल की मेहमाननवाजी, संगीत और मुस्कान आपको हमेशा याद रहेगी।”

लाहुल-स्पीति जनजातीय उत्सव-2026 सिर्फ एक आयोजन नहीं, बल्कि बर्फीली वादियों में धड़कती एक सभ्यता का जश्न है।

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