कुल्लू, करंट न्यूज़ : हिमाचल प्रदेश प्राथमिक शिक्षक संघ जिला कुल्लू ने जिला कुल्लू के जिलाधीश द्वारा जारी उन आदेशों पर गहरी चिंता और कड़ा विरोध व्यक्त किया है, जिनमें जनगणना-2027 के लिए नियुक्त अध्यापकों एवं कर्मचारियों को नियमित कार्यालय अथवा विद्यालय समय के अतिरिक्त प्रातः एवं सायंकालीन समय में जनगणना कार्य पूर्ण करने के निर्देश दिए गए हैं।
संघ के जिला अध्यक्ष एवं समस्त जिला पदाधिकारियों ने संयुक्त बयान जारी करते हुए कहा कि जनगणना देश का अत्यंत महत्वपूर्ण एवं संवेदनशील कार्य है तथा शिक्षक एवं अन्य कर्मचारी सदैव राष्ट्रीय दायित्वों के निर्वहन में अग्रणी भूमिका निभाते रहे हैं। किंतु जनगणना कार्य को नियमित शिक्षण एवं प्रशासनिक कार्यों के साथ-साथ सुबह-शाम अतिरिक्त समय में अनिवार्य रूप से पूरा करने संबंधी आदेश व्यावहारिक परिस्थितियों, मानवीय पक्षों तथा कर्मचारियों की कार्यक्षमता की सीमाओं की पूर्णतः उपेक्षा करते हैं।
उन्होंने कहा कि ऐसी संवेदनहीनता न तो पहले कभी देखी गई और न ही सुनी गई है। देश में अनेक बार जनगणनाएं सम्पन्न हुई हैं और पूर्व में भी शिक्षकों को जनगणना कार्य सौंपा जाता रहा है, परन्तु किसी भी सरकार अथवा प्रशासन द्वारा कर्मचारियों को विद्यालय अथवा कार्यालय समय के अतिरिक्त अनिवार्य रूप से सुबह-शाम जनगणना कार्य करने के ऐसे आदेश जारी नहीं किए गए।
जिलाध्यक्ष कुंज लाल ठाकुर ने कहा कि प्रदेश के अनेक शिक्षकों को उनके विद्यालयों से 15 -20 किलोमीटर दूरी वाले क्षेत्र जनगणना कार्य हेतु आवंटित किए गए हैं। ऐसे में विद्यालय की छुट्टी के पश्चात कर्मचारी पहले 15-20 किलोमीटर दूर अपने जनगणना क्षेत्र तक पहुंचेंगे, फिर सर्वेक्षण करेंगे और उसके बाद अपने घर अथवा किराये के निवास तक लौटेंगे। इस पूरी प्रक्रिया में कई घंटे व्यतीत हो जाएंगे। कर्मचारियों के पारिवारिक दायित्व, भोजन, स्वास्थ्य, विश्राम तथा सामाजिक जीवन जैसे महत्वपूर्ण पक्षों की भी अनदेखी नहीं की जा सकती।
संघ ने विशेष रूप से कहा कि महिला कर्मचारियों एवं शिक्षिकाओं के लिए ऐसे आदेश और भी अधिक कठिनाइयां उत्पन्न करेंगे, क्योंकि उन्हें कार्यालयीय एवं जनगणना कार्यों के साथ-साथ पारिवारिक दायित्वों का भी निर्वहन करना पड़ता है।
जिला अध्यक्ष कुंज लाल ठाकुर ने कहा कि जिला कुल्लू के जिलाधीश द्वारा जारी ऐसे आदेश प्रतीत होते हैं कि बिना व्यापक विचार-विमर्श एवं जमीनी परिस्थितियों का आकलन किए हुए जारी कर दिए गए हैं। इन्हें तत्काल प्रभाव से वापस लिया जाना चाहिए। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि “शिक्षक भी एक सामाजिक प्राणी है। उसका भी एक व्यक्तिगत एवं पारिवारिक जीवन है। वह कोई बंधुआ मजदूर नहीं है।” इसलिए सरकार एवं शिक्षा विभाग को कर्मचारियों की मानवीय गरिमा तथा कार्य परिस्थितियों का सम्मान करना चाहिए।
संघ का मानना है कि शिक्षण कार्य और जनगणना कार्य दोनों ही अत्यंत गंभीर एवं बौद्धिक कौशल आधारित दायित्व हैं। विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान करना तथा जनगणना जैसे राष्ट्रीय महत्व के कार्य में तथ्यात्मक एवं त्रुटिरहित आंकड़े संकलित करना, दोनों ही पूर्ण एकाग्रता, मानसिक ऊर्जा और जिम्मेदारी की मांग करते हैं। मनोवैज्ञानिक दृष्टि से प्रत्येक व्यक्ति की बौद्धिक क्षमता एवं कार्य निष्पादन की एक स्वाभाविक सीमा होती है। उससे अधिक दबाव डालने पर मानसिक तनाव, कार्यकुशलता में कमी तथा त्रुटियों की संभावना बढ़ जाती है।
ठाकुर ने कहा कि देश के विभिन्न राज्यों, विशेषकर उत्तर प्रदेश सहित अन्य क्षेत्रों से पूर्व में भी निर्वाचन एवं सर्वेक्षण संबंधी अतिरिक्त कार्यभार के कारण कर्मचारियों के मानसिक तनाव और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं की खबरें राष्ट्रीय स्तर पर सामने आती रही हैं। ऐसे अनुभवों से सीख लेते हुए सरकार को कर्मचारियों पर अनावश्यक अतिरिक्त बोझ डालने से बचना चाहिए।
राजकीय प्राथमिक शिक्षक संघ कुल्लू ने प्रदेश सरकार, मुख्य सचिव, शिक्षा सचिव, निदेशक उच्च शिक्षा, निदेशक प्रारम्भिक शिक्षा तथा जनगणना निदेशालय से मांग की है कि जनगणना कार्य के लिए कर्मचारियों एवं शिक्षकों को पूर्व की भांति नियमित ड्यूटी समय में ही पर्याप्त समय उपलब्ध करवाया जाए तथा विद्यालयी शिक्षा और जनगणना दोनों कार्यों को संतुलित एवं प्रभावी ढंग से सम्पन्न करने हेतु व्यावहारिक व्यवस्था बनाई जाए। संघ ने यह भी मांग की कि कर्मचारियों से विद्यालय अथवा कार्यालय समय के अतिरिक्त जनगणना कार्य करवाने संबंधी सभी आदेशों की तत्काल समीक्षा कर उन्हें वापस लिया जाए।
कुंज लाल ठाकुर ने बताया कि जनगणना का यह चरण 16 जून से 15 जुलाई तक की निश्चित समयावधि में पूरा किया जाना है। ऐसे में यदि कर्मचारियों को नियमित विद्यालय एवं कार्यालय कार्यों के अतिरिक्त केवल सुबह और शाम के सीमित समय में ही जनगणना कार्य करना पड़ेगा तो इस निर्धारित अवधि में कार्य को पूर्ण करना व्यावहारिक रूप से संभव नहीं है। उन्होंने कहा कि यदि प्रशासन वास्तव में केवल अतिरिक्त समय में ही जनगणना करवाना चाहता है तो इस कार्य को पूरा होने में निर्धारित एक माह नहीं बल्कि कई माह लग सकते हैं।
संघ के पदाधिकारियों ने यह भी चेतावनी दी है कि यदि सरकार एवं शिक्षा विभाग इस अत्यंत संवेदनशील विषय पर शीघ्र संज्ञान लेकर उचित निर्णय नहीं लेते हैं, तो हिमाचल प्रदेश राजकीय प्राथमिक शिक्षक संघ कर्मचारियों एवं शिक्षकों के हितों की रक्षा हेतु हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय की शरण लेने पर विवश होगा।