जंजैहली (मंडी), करंट न्यूज: पूर्व मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर का अभेद्य किला सराज, कांग्रेस के लिए 27 साल का काला वनवास। इस वनवास को तोड़ने के बजाय कांग्रेस के दो क्षत्रप अपने-अपने बेटों के मोह में पार्टी का बंटाधार करने पर तुले हैं। मुख्यमंत्री के करीबी जगदीश रेड्डी को ब्लॉक अध्यक्ष की कुर्सी मिलते ही सराज कांग्रेस दो फाड़ हो गई है।
पहला मंच सजा तो दूसरा गुट नदारद, दूसरे मंच से पहला गायब
ताजपोशी के बाद जगदीश रेड्डी ने बड़ा सम्मेलन करवाया। जिला अध्यक्ष चंपा ठाकुर और प्रदेश सह-प्रभारी आए, मंच से एकजुटता के नारे लगे। लेकिन सबसे बड़ी खबर मौजूदगी नहीं, गैरमौजूदगी थी – प्रदेश उपाध्यक्ष चेत राम ठाकुर और उनका पूरा खेमा गायब। मिल्क फेड के पूर्व अध्यक्ष चेत राम के बिना सम्मेलन खोखला साबित हुआ।
बदले में आज सोमवार को दूसरा खेल हुआ। SC विभाग के ब्लॉक अध्यक्ष पद पर चेत राम गुट के नेता ने कब्जा जमाया और सम्मान समारोह रखा। इस बार प्रदेश अध्यक्ष खुद सराज पहुंचे, लेकिन इस मंच से ब्लॉक अध्यक्ष जगदीश रेड्डी नदारद। बहाना बताया – स्कूल प्रतियोगिता। एक दिन में दो अलग मंच, सराज कांग्रेस की फूट का लाइव टेलीकास्ट।

व्हाट्सएप ग्रुप से शुरू हुई जंग फेसबुक पर पहुंची
यह लड़ाई अब बंद कमरों से निकलकर फेसबुक पर गाली-गलौज तक पहुंच गई है। आरोप है कि ब्लॉक अध्यक्ष रेड्डी ने ब्लॉक कांग्रेस के व्हाट्सएप ग्रुप से यूथ कांग्रेस प्रदेश उपाध्यक्ष तरुण ठाकुर, जो चेत राम ठाकुर के बेटे हैं, और यूथ ब्लॉक अध्यक्ष गोपाल सहगल को बाहर कर दिया। फिर स्क्रीनशॉट वायरल, फिर फेसबुक पर भद्दे कमेंट्स। कांग्रेस की किरकिरी, भाजपा घर बैठे मजे में।
1993 के बाद से कांग्रेस का वनवास, 2027 में भी हार तय?
सराज में आखिरी बार कांग्रेस 1993 में जीती थी, जब ठाकुर मोतीराम जीते और जयराम ठाकुर अपना पहला चुनाव हारे थे। 1998 से जयराम का राज शुरू हुआ तो कांग्रेस का वनवास। तारा ठाकुर, पंडित शिव लाल, चेत राम ठाकुर सब कमल नहीं हरा पाए।
सुक्खू ने किला भेदने को विजय पाल सिंह को नियामक आयोग में सदस्य और जगदीश रेड्डी को ब्लॉक अध्यक्ष बनाया, सोचा पकड़ मजबूत होगी। पर कुर्सी मिलते ही हिस्सेदारी की लड़ाई और भड़क गई।
विचारधारा नहीं, ठेकेदारी और वर्चस्व की लड़ाई
असल लड़ाई विचारधारा की नहीं है। जब तक अपना करियर, ठेकेदारी और अपने गुट की तूती बोल रही थी, तब तक सब ठीक था। अब दूसरे को मौका मिला तो कांग्रेस खतरे में दिखने लगी। यह प्योर अवसरवाद है।
2027 में अभी सवा साल बाकी है, लेकिन अगर कांग्रेस फेसबुकिया गुटबाजी में ही उलझी रही तो 27 साल का वनवास 32 साल में बदलते देर नहीं लगेगी।