पांच बार लगातार जीते, भाजपा को दिया मजबूत गढ़, लेकिन दिल से उतने ही सरल
करंट न्यूज़ डेस्क कुल्लू : हिमाचल की राजनीति में कुछ नाम सिर्फ नेता नहीं, इतिहास होते हैं। हमीरपुर की सियासत को गढ़ने वाले ऐसे ही शिल्पकार थे स्वर्गीय ठाकुर जगदेव चंद।
जनसंघ के दौर से शुरू हुआ उनका सफर 1977 से 1993 तक लगातार पांच जीत के साथ हमीरपुर को भाजपा का अभेद्य किला बना गया। 1923 में जन्मे इस दबंग, लेकिन बेदाग ईमानदार राजनेता का निधन 6 दिसंबर 1993 को हमीरपुर अस्पताल में हुआ, पर उनकी विरासत आज भी जिंदा है।

कड़क मिजाज का खौफ, पर अंदर से बेहद आत्मीय
ठाकुर जगदेव चंद के बारे में कहा जाता था कि वह बहुत कड़क लहजे में बात करते हैं। उनका खौफ था। ऐसी ही एक याद करंट न्यूज के संपादक धर्मचंद यादव से भी जुड़ी है। पत्रकारिता में प्रवेश के बाद दिल्ली से प्रकाशित पत्रिका “युवा माधवी” के लिए पत्रकार के तौर पर पहला राजनीतिक इंटरव्यू ठाकुर जगदेव चंद का ही लिया था।
संपादक याद करते हैं, “मैं सचिवालय में उनके कार्यालय पहुंचा। वह उस समय परिवहन मंत्री थे और शांता कुमार से छत्तीस का आंकड़ा चल रहा था। वह किसी अधिकारी से चर्चा कर रहे थे।

मुझे बैठने का इशारा कर फिर चर्चा में मशगूल हो गए। फ्री हुए तो हमीरपुरी में ही बोले – ‘दस मुन्नू क्या कम हा।’ मैं उस समय बहुत छोटी उम्र का था। चर्चा चली तो हर सवाल का बेबाक जवाब देते गए।
निकलने लगा तो बोले – ‘कभी भी कोई काम हो सीधे आना।’ दरवाजे के पास पहुंचा तो हल्की मुस्कान के साथ बोले – ‘शांता कुमार वाली चर्चा थोड़ी कम व हल्की-फुल्की लिखना।’ यही थी उनसे पहली मुलाकात, जो आज भी उनके प्रति सम्मान का एहसास करवाती है।”
यही थे जगदेव चंद – बाहर से दबंग, अंदर से सरल और अपने लोगों के लिए हमेशा दरवाजा खुला रखने वाले।
विकास पुरुष, जिसने बसों को घाटे से उबारा
शांता कुमार सरकार में परिवहन मंत्री रहते उन्होंने वो किया जो पहले किसी ने नहीं सोचा था। बस हादसे में घायल यात्रियों को तब सिर्फ 2,000 रुपये मिलते थे। उन्होंने यात्री बीमा योजना की पहल कर इसे 25,000 रुपये तक पहुंचाया। उनके कार्यकाल में हिमाचल पथ परिवहन निगम ने पहली बार लाभ कमाया।

हमीरपुर के विकास में उनका योगदान नींव का पत्थर है – सिविल अस्पताल का उन्नयन, इंजीनियरिंग कॉलेज की स्थापना, बस स्टैंड, पहला मिनी सचिवालय और राजस्व सुधार। ट्रिब्यून तक ने उनके विकास कार्यों को दर्ज किया।
ईमानदारी से बनाया गढ़, विरासत आज भी कायम
उनकी राजनीति का मूल मंत्र था सादगी और ईमानदारी। बिना तामझाम के जनता के बीच रहना। इसी छवि ने हमीरपुर को भाजपा का गढ़ बनाया। उनके बाद उनके पुत्र नरेंद्र ठाकुर और पुत्रवधू उर्मिल ठाकुर भी विधायक बने।

सुजानपुर में ठाकुर जगदेव चंद मेमोरियल कॉलेज, हमीरपुर का टाउन हॉल और नेरी का इतिहास शोध संस्थान आज भी उनकी स्मृति को जीवित रखे हैं।
1993 में पांचवीं जीत के बाद उनका अचानक जाना हमीरपुर के लिए बड़ा खालीपन था, उपचुनाव में कांग्रेस की अनीता वर्मा जीतीं। पर ठाकुर जगदेव चंद की कहानी सिर्फ पांच जीतों की नहीं, एक ऐसे दबंग-ईमानदार जननेता की कहानी है जिसने हमीरपुर की सियासत की दशा और दिशा दोनों बदल दी। आज भी वह लोगों के दिलों में बसे हुए हैं।