कुल्लू, करंट न्यूज़ : गुरुवार को ध्यान साधना के प्रातःकालीन सत्र में प्रवचन करते हुए सन्त सुधांशु महाराज ने साधकों को बताया कि ब्राह्मण से जुड़ने के लिए अपने अन्दर भाव की तरंग उत्पन्न करना और वही तरंग से जीवन को प्रवाहित करना है।

मन का विचार जो चिंगारी की तरह है और वह भावना उत्पन्न करती है। उन्होंने एक सफल और आदर्श व्यक्ति बनने के लिए कई महत्वपूर्ण बिन्दु बताकर अपनाने को कहा।

सन्त सुधांशु महाराज ने कहा कि बीमारी व्यक्ति को मानसिक रूप से बीमार कर देता है और व्यक्ति घबरा जाता है। ऐसे परिस्थितियों में स्वयं को जल्द से ठीक करने को सोचें। जीवन में घटना तो होगी लेकिन संभालने की कला आनी चाहिए।

उन्होंने जीवन के पहलुओं पर बोलते हुए कहा कि मानसिक रूप से संतुलित करें और अनुशासन जीवन बनाकर नियम से साथ चलने वाले कभी भी निराश नहीं होते हैं। हम सभी नकारात्मक विचारों को जल्द से ग्रहण कर लेते हैं और सकारात्मक विचारों से दूर होते हैं।

इस अवसर पर ध्यान एवं योग गुरु डॉ अर्चिका दीदी ने उपस्थित सभी साधकों को अपने जीवन में कैसे सुख समृद्धि प्राप्त हो के बारे में बताते हुए टिप्स दिए।